गैर-संस्थागत सेवाएं

दत्तक ग्रहण:

“दत्तक ग्रहण ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से दत्तक ग्रहण किए गए बच्चे को उसके जैविक माता-पिता से स्थाई रूप से अलग किया जाता है और वह सभी अधिकारों, लाभों और दायित्वों के साथ अपने दत्तक ग्रहण करने वाले माता-पिता के रूप में संदर्भित नये माता-पिता का कानूनी पुत्र बन जाता है। विधिक रूप से स्वतंत्र घोषित किये गये निराश्रित, बेसहारा एवं अभ्यर्पित बालकों को दत्तक ग्रहण में दिया जाता है। प्रदेश में 38 विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी संचालित है।”

“ दत्तक ग्रहण हेतु पात्रता ”

  • एक व्यक्ति चाहे उसकी वैवाहिक स्थिाति कुछ भी हो।
  • माता-पिता उसी लिंग का बच्चा चाहे उसके कितने ही जीवित जैविक पुत्र या पुत्रियां हो।
  • एक निःसंतान दंपत्ति।
  • वैवाहिक संबंध के 2 वर्ष पूरे होने पर।
  • लिव इन रिलेशन वाले दंपत्तियों को बच्चे के दत्तक ग्रहण की पात्रता नहीं है।
  • 0-3 वर्ष के आयु समूह के बच्चे के दत्तक ग्रहण हेतु माता-पिता की सम्मिश्रित आयु 90 वर्ष एवं 3 वर्ष से अधिक के आयु के बच्चों हेतु माता-पिता की सम्मिश्रित आयु 105 वर्ष
  • एकल पुरूष बालिका को दत्तक पर नहीं ले सकेगा।

पालन पोषण देखरेख (Foster Care) :

“18 वर्ष से कम आयु के निराश्रित, बेसहारा, परित्यक्त बच्चों के समग्र कल्याण एवं पुर्नवास हेतु गैर संस्थागत पालन पोषण एवं देखरेख हेतु फ़ॉस्टर केयर योजना (Foster Care) स्वीकृत हैं। योजना के तहत् बच्चों को अस्थाई रूप से पालन पोषण हेतु पालन पोषण देखरेख में तब तक के लिए सौंपा जाता है, जब तक कि उनकी पारिवारिक परिस्थितियां सुदृढ़ न हो जाए। ”

पालन- पोषण देखरेख हेतु उपयुक्त बालक:

  • ऐसे परिवारों के बालक जिनके जैविक माता-पिता किन्हीं गलत कार्यों मे लिप्त हैं या जिनके माता-पिता या तो सक्षम नहीं हैं या संकट की स्थिति में हैं तथा बालक की देखरेख की स्थिति में नहीं हैं या माता-पिता जीवित नहीं हैं।
  • ऐसे बालक जिनकी शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं में देखभाल की जा रही है, उन्हें पारिवारिक जीवन जीने का अवसर देना।
  • ऐसे बालक जिन्हें विभिन्न कारणों से दत्तक पर नहीं दिया जा सकता है।

पालन- पोषण देखरेख हेतु सक्षम व्यक्ति/संस्था :

  • एकल माता-पिता।
  • दंपत्ति।
  • बालक के विस्तारित कुटुम्ब के सदस्य (रिश्तेदार)।
  • ऐसे गैर सरकारी संगठन अथवा अन्य मान्यता प्राप्त व्यक्ति/अथवा अभिकरण जो व्यक्तिगत तौर पर अथवा समूह पोषण देखरेख के लिए बालक /बालकों की जिम्मेदारी लेने के इच्छुक हों।

सहायता राशि:

“पोषण देखभाल करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को बच्चे के सरंक्षण, भरण पोषण, शिक्षण-प्रशिक्षण, चिकित्सीय देखभाल हेतु राशि रूपए 2000 प्रतिमाह, प्रति बच्चा दिए जाने का प्रावधान है। यह राशि तब तक प्रदान की जाती है जब तक कि बच्चे की पारिवारिक स्थितियों में सुधार न हो या वह स्वयं अपने कुटुम्ब में वापिस लौटने के योग्य न हो जाए या वयस्क होने तक जारी रह सकती है। ”

प्रर्वतकता (Sponsership) :

“निर्धन परिवारों को इस योजना का लाभ दिया जाता है ताकि वह अपने बच्चों का भरण-पोषण, शिक्षा एवं चिकित्सीय व्यवस्था कर सकें।

प्रवर्तकता सहायता निम्न प्रकारों मे उपलब्ध करवाई जायेगीः

निवारकः

बच्चे के परिवार में बने रहकर अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए परिवारों को प्रवर्तकता (sponsership) सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। यह बच्चों को निराश्रित/असुरक्षित बनने, भागने, बाल विवाह के लिए विवश किए जाने बाल श्रम मे ढकेले जाने, संस्था में निवास करने हेतु विवष होने आदि से बचाने वाला एक प्रयास है।

पुनर्वास:

निर्धनता के कारण संस्थाओं मे रह रहे बच्चों को प्रवर्तकता सहायता द्वारा परिवारों मे वापस मिलाया जा सकता है।

योजना का फोकस (संकेंद्रण):

योजना के प्रारंभ में पहले से बालगृहों में रह रहे बालकों के पुनर्वास पर संकेंद्रण है। अतः समेकित बाल संरक्षण योजना के प्रथम चरण के क्रियान्वयन में ऐसे संस्थागत बालकों के परिवार आधारित प्रवर्तकता को प्राथमिकता दी जायेगी जिनके दोनों अथवा कम से कम एक पालक जीवित हों ताकि ऐसे बालकों/बालिकाओं को उनके जैविक परिवार से पुर्नएकीकृत किया जा सके। #8221;

बालकों के चयन का आधार

  • बालक 0-18 वर्ष की आयु का हो।
  • बालक, बालगृह में लगातार 6 माह से अधिक समय से निवासरत हो ।
  • आर्थिक सहयोग कर उसके परिवार में पुनःस्थापित किया जा सकता हो।
  • परिवार की वार्षिक आय 24,000 रूपए से अधिक न हो।
  • ऐसे बालकों को प्राथमिकता दी जाती है जिनके पालक एकाकी माता, विधवा स्त्री, एचआईवी/कुष्ठ रोग से पीडित अथवा जेल में निरूद्ध हों ।