संस्थागत सेवाऐं

उद्देष्य:

“किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 के प्रावधानों अनुसार कठिन परिस्थितियों में रहने वाले तथा विधि विवादित बालकों के समग्र कल्याण एवं पुर्नवास हेतु समेकित बाल संरक्षण योजना वर्ष 2009 से प्रारम्भ की गयी है। यह योजना बाल अधिकार संरक्षण और सर्वोत्तम बालहित के दिशा निर्देशक सिद्वान्तों पर आधारित है। ”

संचालित संस्थाऐं

“प्रदेश में विधि विवादित अनाथ, बेसहारा एवं देखरेख तथा संरक्षण वाले बालको के भरण पोषण, शिक्षा, चिकित्सा एवं पुर्नवास हेतु 142 शासकीय/ अशासकीय संस्थाऐं संचालित है। ”

  • शिशुगृह (विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण)
  • बालगृह
  • आश्रय गृह
  • खुला आश्रय गृह
  • सम्प्रेक्षण गृह
  • विशेष गृह
  • पश्चातवर्ती गृह

शिशुगृह (विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण) :

“शिशुगृहों में 0 से 06 वर्ष की आयु के बेसहारा, निराश्रित, परित्यक्त एवं अभ्यर्पित बालकों को रखा जाता है। यहाँ इन बालकों की पूर्ण देखरेख की जाती है। इन बालकों को दत्तक ग्रहण पर दिया जाता है। प्रदेश में 38 शिशु गृह शासकीय/अशासकीय संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे है।”

बालगृह :

“बालगृहों में 7 से 18 वर्ष के "देखरेख और संरक्षण के लिये जरूरतमंद बालकों" को रखा जाता है। यहाँ इन बालकों को भरण पोषण, उपचार, शिक्षण, प्रशिक्षण, की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त पारिवारिक एवं व्यावसायिक पुर्नवास कर समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित करने का कार्य भी किया जाता है। प्रदेश में 60 बालगृह शासकीय/अशासकीय संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे है। ”

आश्रय गृह :

“संरक्षण की तत्काल आवश्यकता वाले निराश्रित, उपेक्षित एवं भागे हुए बालकों को आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य के तहत् आश्रयगृह की स्थापना की गयी है। यहां बालक/बालिकाओं को मानव अधिकारों के परिप्रेक्ष्य में अनिवार्य भौतिक सुविधायें उपलब्ध करायी जाती है। प्रदेश में 12 आश्रय गृह अशासकीय संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे है।”

खुला आश्रय गृह :

“18 वर्ष तक की आयु के गृहविहीन, फुटपाथ पर घूमने वाले, सड़क पर रहने वाले और कामकाजी बच्चों तथा बाल भिक्षुकों को आश्रय देने हेतु इन गृहों की स्थापना की गई है। यहां शिक्षण, प्रशिक्षण, मनोरंजन, परामर्श के द्वारा जीवन कौशल, व्यक्तित्व विकास, आत्म-सम्मान वर्धन एवं जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया जाता है। प्रदेश में 09 खुला आश्रय गृह अशासकीय संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे है।”

सम्प्रेक्षण गृह :

“सम्प्रेक्षण गृहों में विधि का उल्लंघन करने वाले 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों को जमानत न होने तथा किशोर न्याय बोर्ड में प्रकरण के विचारण तक रखा जाता है। यहां भरण पोषण, चिकित्सीय परीक्षण, उपचार, शिक्षण, प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रदेश में 18 संप्रेक्षण गृह शासकीय/ अशासकीय संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे है। ”

विशेष गृह :

“किशोर न्याय बोर्ड के आदेशानुसार दोष सिद्ध होने पर सुधार हेतु किशोरों को विशेष गृहों में रखा जाता है। यहां किशोरों को संरक्षण, भरण-पोषण, शिक्षण-प्रशिक्षण एवं पुनर्वास सुविधायें प्रदान कराई जाती है, जिससे उनका समाज में व्यस्थापन हो सके। प्रदेश में 03 विशेष गृह शासकीय संस्थाओं द्वारा संचालित किये जा रहे है।”

पश्चातवर्ती गृह :

“पश्चात्वर्ती गृहों में विशेष गृहों एवं बालगृहों से 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरान्त निराश्रित, उपेक्षित, उन्मुक्त हुये बालक/ बालिकाओं को 20 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक रखा जाता है। यहां इन किशोरों की संरक्षण, भरण-पोषण, शिक्षण-प्रशिक्षण की सुविधाएं प्रदान की जाती है एवं सामाजिक एवं व्यवसायिक पुनर्वास किया जाता है। प्रदेश में 02 पश्चात्वर्ती गृह शासकीय संस्थाओं के द्वारा संचालित किये जा रहे है।”