बाल कल्याण समिति

“किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000, की धारा 29 के तहत् देखरेख और संरक्षण के लिये जरूरतमंद बालकों के प्रकरणों के निवर्तन हेतु बाल कल्याण समिति का प्रावधान है। समिति में एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य (कम से कम एक महिला निवार्य) अशासकीय सदस्य होते है। इनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। वर्तमान में प्रदेश के 50 जिलों में गठित है। ”

बाल कल्याण समिति के कार्य:

  • 18 वर्ष तक की आयु के देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले जरूरतमंद बालकों के प्रकरणों का निराकरण करना।
  • समिति के समक्ष प्रस्तुत किशोर न्याय अधिनियम में विहित श्रेणी के बालकों को शिशु गृह/आश्रय गृह/बाल गृह में स्थायी/अस्थायी रूप से रखे जाने हेतु आदेश परित करना।
  • दत्तक ग्रहण से पूर्व अनाथ परित्यक्त बालकों को विधिक रूप से स्वतंत्र घोषित करना।
  • अन्य विभागों यथा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुलिस इत्यादि से समन्वय बनाना।
  • बाल कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत् गैर शासकीय संगठनों यथा चाइल्ड लाइन, मान्यता प्राप्त अशासकीय संस्थायें से समन्वय बनाना।
  • जिलें में संचालित शासकीय/अशासकीय गृहों यथा शिशु गृह/आश्रय गृह/बाल गृह में पर्यवेक्षण करना।
  • बालकों के सर्वहित एवं मौलिक अधिकार के संरक्षण का कार्य।
  • देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले जरूरतमंद बालकों को परामर्श प्रदान करना।

बाल कल्याण समिति के सदस्यों की योग्यता

  • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक
  • सामाजिक कार्य, बाल मनोविज्ञान, शिक्षा, समाजशास्त्र या गृह विज्ञान के विशेष ज्ञान के पृष्ठभूमि वाला प्रतिष्ठित, शिक्षित नागरिक
  • कोई शिक्षक या चिकित्सक अथवा वरिष्ठ सेवानिवृत्त लोक सेवक, जो बाल कल्याण से सम्बंधित कार्य में लगा हो, या
  • कोई ख्याति प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता, जो बाल अधिकारों के कार्य में प्रत्यक्षतः लगा हो।